Showing posts with label Hindi poem. Show all posts
Showing posts with label Hindi poem. Show all posts

Monday, 2 July 2012

Mithaas

मिठास..

यूँ शाम को चाय के प्याले से गपशप हो गयी 
मीठा तो डाला था मैंने, फिर मिठास कहाँ खो गयी ?
प्याला जैसे मुस्कुरा उठा, मुझ पर ही झला उठा,
बोला मिठास मुझसे नहीं जिन्दगियों से गायब है,
आधुनिकता के इस दौर में मिठास की क्या कीमत है?
अगर पहचान है तुझे मिठास के गुणों की ...
जा जाकर ढून्ढ ला उसे दबे हुए अरमानों से,
बचपन के उस भोलेपन से,पुराने किन्ही मकानों से,
माँ की रसोई से, गाँव के खलियानों से,
परियों की कहानी से, उन खोये हुए ज़मानो से,
ढून्ढ कर बाँट देना उसे सब जाने-अनजानों में,
जिंदगियां फिर मीठी हो जाएँगी और मिठास ही है बांटने से बड़ जाएगी,
बांटने से बड़ जाएगी ....... 

Friday, 9 September 2011

Sajaa

चली में उड़ चली,
नए सपनो की ओर,
छोड़ पराया देश
अपने घर, अपनों की ओर,
पर घर तो था ही नहीं,
अपनों का भी पता नहीं,
पडोसी कुछ जाने पहचाने थे,
मेरे पास आये मिलने के बहाने से,
ना जाने क्यूँ मुझको देख रहे थे,
ना जाने क्या मुझमे देख रहे थे,
मैं भी खड़ी थी बेहाल सी,
उनके सामने सवाल सी,
थोड़े झिझके ;थोड़े ठिठके,
आखिर में फिर हिम्मत कर बोले,
बम फटा था, गोलियां चली थी,
यही मोहल्ला, यही गली थी,
दुश्मन कौन था नहीं पता,
पर मेरे अपनों की थी क्या खता,
शायद की वो उस देश के वासी है;
जिससे जलाने की सज़ा सिर्फ जेल,
बचाने की सज़ा फांसी है,
अज़ाद कराने की सज़ा फांसी है.....